कृषी

सुखाग्रस्त घोषित करके किसानों को फसल बिमा का शिघ्रता से मुआवजा करे।-सौरभ बेलखेडे, सामाजिक कार्यकर्ता

पुरे महाराष्ट्र में तुफान कि तरह फैलने वाला

पोलीस कि आवाज न्यूज़ नेटवर्क

तुमसर वार्ता:-मिली जानकारी के अनुसार गोबरवाही अंचल में मुख्यतः गोबरवाही, चिखला, नाकाडोंगरी, आष्टी, डोंगरीबुजुर्ग, परिसर का समावेश होता है. अधिकांश गांव आदिवासी जनसंख्या के हैं. जिनकी खेती वर्षा के भरोसे होती है. इस क्षेत्र के किसान हलाकान हो गए हैं लेकिन सरकार को दया नहीं आ रही है. किसानों को राहत देने के लिए अभी तक कोई भी कदम सरकार ने नहीं उठाए हैं. इस क्षेत्र में इस वर्षा औसत भी अत्यंत कम होने के कारण क्षेत्र की बहुत सी कृषि भूमि पडित रह गई. मुख्यतः इस अंचल में धान की फसल ली जाती है. जैसे-तैसे किसानों ने तालाब, बोडी, नाले, बंधारे से पानी लेकर धान की रोपाई की. उसके बाद पिछले 25 दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण धान की फसलों को नुकसान पहुंचा है. गोबरवाही क्षेत्र के अनेक गांवों में राजीव गांधी सागर प्रकल्प से सिंचाई की व्यवस्था न होने के कारण इन गांवों में फसलों की स्थिति चिंताजनक हो गई है. उधर, दूसरी ओर कृषि पंपों को सिर्फ रात्रि में वह भी अनियमित रूप से बिजली पूर्ति होने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है. अनेक किसानों ने ग्रीष्मकालीन धान शासकीय खरीदी केंद्रों को बेचा था. उनके पेमेंट भी अभी तक हैं, वह खाली पड़े हैं.फसलों के नुकसान सर्वेक्षण की मांगनहीं मिलने से किसान आर्थिक रूप से परेशान हैं. खरीफ धान फसल लेने के लिए किसानों ने अभी तक बिजाई से लेकर रासायनिक खाद, कीटनाशक दवाइयां, रोपाई, निंदाई खर्च आदि पर बहुत सारा रुपया खर्च कर दिया.

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अधिकांश किसान हल्के मोटे धान की कम समय में आने वाली फसल उगाते हैं. जिसे वे सरकारी धान खरीदी केंद्र पर ले जाकर बेचते हैं. गणेश उत्सव के बाद या शारदीय नवरात्र प्रारंभ होते समय हल्के धान की कटाई की जाती है. बालापुर हमेशा, गणेशपुर, पवनारखारी, येदरबुची सुंदरटोला, सीतासावंगी, गोबरवाही, हेटीटोला आदि ऐसे गांव हैं, जहां सिंचाई के साधन नहीं के बराबर हैं. जो तालाबइन गांवों में राजीव गांधी सिंचाई प्रकल्प से सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है. बावनथडी नदी के किनारे बसे गांव के किसान नदी किनारे बनाए गए कुओं से मोटर पंप लगाकर सिंचाई करते हैं. वही उन्हें राजीव गांधी सिंचाई प्रकल्प का लाभ भी मिलता हैं, परंतु वर्षा के भरोसे जो किसान है, उनके सामने सूखे का खतरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता युवा किसान सौरभ बेलखेड़े ने राज्य सरकार के पोर्टल पर मुख्यमंत्री को पत्र देकर क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को उजागर करते हुए उचित ध्यान देकर फसलों के हुए नुकसान का सर्वेक्षण करने की मांग की है. इस प्रकार नुकसान का फसल बीमा का मुआवजा शीघ्र से शीघ्र दिलाने का सुझाव दिया है. संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रभावित गांवों को सूखाग्रस्त घोषित करने की व किसानों को सहायता करने की मांग है।

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