आंधी तूफान से फसल हुई खत्म -किसान डूबा कर्जे में
चन्द्रशेखर भोयर
सिहोरा:- लगातार बारिस व आंधी
तूफान ने सिहोरा क्षेत्र के किसानों को कहीं का नही छोड़ा. हर बार किसान कहीं ना कहीं फस ही जाता हैं. बड़ते खाद् के रेट, परा लगाने के लिए मजदूर की बढ़ती हुई पैसे की मांग, चिखल के लिए ट्रैक्टर के बढ़ते रेट और सबसे ज्यादा गड्डे मे किसानों को डालता है ओ है आज का मौसम.


सिहोरा परिसर के किसानों को बेमौसम बारिस ने पूरी तरह खत्म कर दिया. ग्राम देवरी, बिनाखी, टेमनी, देवसर्रा, चांदपुर, वाहनी,मांडवी, पिपरीचुन्नी, सोंड्या और मुरली गाव में ज्यादातर किसान धान की फसल लेते हैं. बढ़ती महंगाई किसानों के लिए एक समस्या बन चुकी है.


बारिस व तूफान से फसल हुई खत्म
पिछले कुछ दिनों से दो से तीन दिन में आने वाली बारिस किसानों के विनास का कारण बन चुकी है. सात तारिख को हुई बारिस व तूफान के कारण किसानों का खड़ा धान पूरी तरह गहरी नींद में सो गया है. जिसके कारण धान की फसले प्रभावित हो चुकी है. कुछ कुछ किसानों की पूरी फसल बंधियों मे सो जाने के कारण व रुख रुख के आने वाले बारिस के कारण किसान खेत की फसल काट नही पा रहा है. हात मे आयी हुई फसल कहीं की नही रही. हर किसान कहीं ना कहीं से कर्जा लेकर के धान की फसल लेता है और मिलने वाले इनकम से कर्जा ब्याज के साथ वापस करता है. किंतु इस बार फसल खेत में ही खत्म होने की कगार में होने के कारण किसान फिरसे कर्जे मे डूबकर हतास होते दिखाई दे रहा है.
फसल के पंचनामे चेहरे पर निर्भर है
हर किसानों के फसलों की बर्बादी हो चुकी है. किंतु जब पंचनामे की बात आयी तो चेहरे देख कर क्षेत्र के तलाठी पंचनामे करते दिखाई दे रहे हैं. तक्रार करने पर, आप का धान पूरी तरह पानी मे डूबा है क्या? जब तक पानी में डूबा नही होगा तब तक पंचनामे की जरूरत नही. ऐसी वार्ता तलाठी करते दिखाई दे रहे हैं. जिसका बुरा प्रभाव किसानों पर पड़ते दिखाई दे रहा है. राजनीतिक प्रभाव हो तो पहले नींद से उठकर जायेंगे, नहीं तो नींद में सोयेंगे. ऐसी स्तिथि आज हमें दिखाई दे रही है.
किसानों को मिलने वाली नुकसान भरपाई भी आज किसानों को रूला रुला कर देने की वजह से कुछ किसान डिप्रेशन में जाने की जानकारी मिली है.

