नवनिर्वाचित शिक्षक विधायक ज मो अभ्यंकर कोंढाली में
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत: कला-खेल और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया जाय बिना प्रधानाचार्य के 25 हजार स्कूलें
विधायक ज. मो. अभ्यंकर
कोंढाली- दुर्गा प्रसाद पांडे
महाराष्ट्र को शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी बनाने और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए, शिक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है, यह बात राज्य के शिक्षक विधायक जे एम अभ्यंकर ने लाखोटीया भुतडा कनिष्ठ महाविद्यालय में अपनी अमरावती यात्रा के दौरान कोंढाली के प्राथमिक
जिल्हापरिषद स्कूल कोंढाली तथा लाखोटीया भुतडा कनिष्ठ महाविद्यालय में पहूंचकर दोनो स्कूलों के प्रांगण का निरिक्षण तथा स्थिनिय शिक्षकों के समस्या जानने के लिये सुबह १०-३०जि प प्रायमरी तथा११बेजे
महाराष्ट्र राज्य के नवनिर्वाचित शिक्षक विधायक अमरावती के शैक्षिक कार्यक्रम के लिए जा रहे थे, तो उन्होंने कोंढाली जि प प्राइमरी स्कूल और लखोटिया भुतडा जूनियर कॉलेज का निरिक्षण किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने यहाँ के प्राथमिक विद्यालय व कनिष्ठ महाविद्यालय की समस्याओं को जानने के बाद यहां के लखोटिया भूतड़ा जूनियर कॉलेज के दौरे के दौरान उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से पूछताछ की. इस अवसरपर पर कोंढाली लाखोटीया भुतडा हायस्कूल व कनिष्ठ महाविद्यालय द्वारा नवनिर्वाचीत विधायक ज मो अभ्यंकर का सत्कार किया गया.इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में मैनपावर की भारी कमी है. वास्तव में जिस देश की शिक्षा व्यवस्था श्रेष्ठ होती, है वह देश महान होता है। लेकिन हमारे देश और प्रदेश में तस्वीर इसके उलट है. 1999 में राज्य के विभागों में 20 लाख कर्मचारी थे और राज्य का बजट 40 हजार करोड़ था और कर्मचारियों पर 20 हजार करोड़ खर्च होते थे. 25 साल बाद कर्मचारियों की संख्या 13 लाख 43 हजार है और कर्मचारियों पर खर्च 1 लाख 06 हजार करोड़ है. राज्य में सात लाख पद खाली हैं. लेकिन सरकार का कहना है कि सिर्फ 60 हजार पद खाली हैं.
25 हजार स्कूलें प्रधानाचार्य विहीन
राज्य के 25 हजार स्कूलों में हेडमास्टर नहीं हैं, जबकि कर्मचारियों की संख्या सात लाख से कम है। निस्संदेह, सिर के बिना शरीर की शिक्षा के क्षेत्र में इतनी बड़ी दुर्दशा है। उन्होंने
के.कस्तूरीरंजन समिति
का जिक्र करते हुए कहा कि फिनलैंड देश की जैसी शिक्षा प्रणाली के आधार पर एक नई शिक्षा नीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें कला, खेल और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। हालाँकि, सरकार ने संगीत (कला) और खेल शिक्षकों के पदों को रद्द कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में चार शिक्षकों की जगह एक शिक्षक द्वारा पढ़ाई करायी जाती है. इन सभी समस्यांओ को विधान परिषद में शिक्षक विधायक होने के नाते विधान परिषद नियमाली के आधार का इस्तेमाल कर शिक्षा क्षेत्र को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे और विधायक अभ्यंकर ने आगे कहा कि राज्य के शिक्षा क्षेत्र को दिशा देने के लिए समय के साथ इसमें बदलाव की जरूरत है. विद्यार्थियों को केन्द्र बिन्दु मानकर उनके शैक्षणिक, मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक सर्वांगीण विकास के लिए उनकी मानसिकता को पहचानकर तनाव मुक्त शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। बुनियादी शिक्षा के माध्यम से छात्रों के मन में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा हो, इसके लिए सक्रिय शिक्षा दी जानी चाहिए। व्यावसायिक, कौशल उन्मुख, तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए। शिक्षा विभाग को विद्यार्थियों को शैक्षणिक प्रक्रिया में प्रोत्साहित करने हेतु निरन्तर प्रयासरत रहना चाहिए।


यह विचार शिक्षक विधायक जे मो अभ्यंकर ने लाखोटिया भूतड़ा जूनियर कॉलेज में शिक्षकों के सम्मान समारोह के अवसर पर व्यक्त किये. इस अवसर पर विधायक अभ्यंकर ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया. इस अवसर पर प्राचार्य सुधीर बुटे, उप प्राचार्य कैलास थुल, परीक्षा प्रमुख सुनील सोलव, संजय अगरकर, बागवानी प्रमुख शाम धिरण, कुसुम वरठी, शिवाजी जामदार,तथा महाराष्ट्र राज्य शिक्षक सेना संघ के सचिव राउत, तुषार अंजनकर, दिलीप चौके, गुरूदास कठाणे,यादव पंधराम, शुभम राऊत, प्रकाश मलवे,हरि राऊत तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।



