राजकीय

सत्ताधारीओं का ओबीसी को लुभाने का प्रयास -पूर्व सांसद डॉ .खुशाल बोपचे

गोंदिया (संजीव भांबोरे )समस्त ओबीसी बहुजन मतदाता भाईयों और बहनो लोकसभा और कुछ राज्यो के विधानसभा चुनाव की सरगर्मी सुरु हो चुकी है बडी मुद्दत के बाद देश का ओबीसी थोडा जाग्रती की ओर कदम बढाणे लगा है


यह जनजागृती अल्प है बावजुत उसके सभी राजनीतिक दलो की ओबीसी को लुभाने के लिए जैसे स्पर्धा लगी है मगर काफी सोच समजकर अपना हितेसी या अपना हित सत्रू कोण ,,? इस बात का भी हमको अध्ययन करणा पडेगा हमने आनेवाले दिनो मे बहोत सोच समजकर निर्णय लेणे की आवश्यकता है उदा. महाराष्ट्र मे ओबीसी की जनजागृती कुछ सालो से सभी ओबीसी संघटनो के माध्यम से की जा रही है जिसके परिणाम स्वरूप कुछ छुटपुच परिणाम आणे भी लगे तो यहा पर भी सत्ता धारी दल यहा के ओबीसी को कैसा लुभाया जाए इसलिये सक्रिय हो गये महाराष्ट्र मे ओबीसी जनमोर्चा और ओबीसी बहुजन महासंघ इनोने मिलकर काम करणे का संकल्प मुंबई के मराठी पत्रकार भवन मे हुयी परिषद मे महाराष्ट्र मे अलग जगाने का संकल्प लिया मूलभूत प्रश्नो के साथ मराठा कुणबी और कुणबी मराठा की सर्टिफिकेट देणे के संदर्भ का जि. आर. महाराष्ट्र की सरकार ने निकालने के बाद मे इसके खिलाफ पुरे महाराष्ट्र मे जन आक्रोश के माध्यम से व्यक्त किया गया जिसके परिणाम स्वरूप महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने राज्य की कुछ ओबीसी संघटनावों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया मगर सभी संघटनावों को नहीं बुलाया गया बरसो से अभि तक काम करणे वाली अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन रजि . संस्था को भी नजर अंदाज किया गया मगर वहा के सारे मिटिंग की हुयी चर्चा इसका अध्ययन किया जाए तो परिणाम शुन्य है तभी
कुछ संस्थावों के चाटू कारिता के परिणाम सामने आही गये कुछ लोगो ने तो हमारी सारे मांगे मंजूर हो गयी यह बात कहकर उपोषण छुडा दिये गये l क्या ओबीसी की 75 साल की लढाई ये 2 जि. आर. तक ही सीमित है?
या आणेवाले अधिवेशन मे ओबीसी को भरपूर अर्थ संकल्प मे निधी देणे के संदर्भ का मोगम आस्वासन
यही तक ओबीसी की लढाई सीमित है l
मूलभूत लढाई जबतक इस देश मे ओबीसी की जातीगत जनगणना नहीं होती तबतक ये सारे लॉलीपॉप अर्थशुन्य है l ओबीसी के सवैधानिक अधिकार मात्र किसी भी एक जात तक सीमित नहीं है l इस बात का भी ध्यान ओबीसी को रखना पडेगा l जो अधिकार राज्यो को नहीं है l
तभी अगर केंद्र की सरकार जनगणना नहीं करती तो बिहार के धर्ती पर महाराष्ट्र मे भी करणा चाहिये ये बात
कुछ ओबीसी संघटना के प्रतिनिधी कहते होंगे इससे हास्यास्पद बात और क्या हो सकती है l
इसलिये ओबीसी को अपने हितचिंतक तथा हितशत्रू कोण इन बातो का भी अध्ययन करणे की आवश्यकता हैl आगे की बाते अगले क्रम मे अभि तो इतना ही काफी है l ….

                       आपका
               डॉ. खुशाल बोपचे

राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ
पूर्व सांसद भंडारा लोकसभा महाराष्ट्र.

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