सामाजिक

क्या होगा सरकारी स्कूल/कॉलेज का?– एडवोकेट डॉ .सत्यपाल कातकर

संपूर्ण महाराष्ट्रात सर्वांत जास्त पसंतीदा

पोलीस कि आवाज न्युज नेटवर्क

चंद्रपूर (संजीव भांबोरे )अधिकांश सरकारी कंपनीमें(डिफेंस जैसे) और पब्लिक सेक्टरमें (WCL,ONGC आदि) या सरकारी सेवामें कार्यरत एम्प्लॉई अपने बेटे/बेटियों को सिर्फ अंग्रेजी कॉन्वेंट प्रायव्हेट स्कूलों में पढ़ाते है। इतनाही नही तो डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारधारा की बात करनेवाले एक तरफ सभी निजी संस्थानों का राष्ट्रीयकरन करने की बात करते (डॉ.बाबासाहब अम्बेडकर* निजीकरण के कट्टर विरोधक थे,महात्मा फुले शिक्षा को निजी संस्थानोंको देनेके सख्त खिलाफ थे) की केवल बात करते है सच तो यह है वेभी अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में नही पढ़ाते है। वे अनएडेड प्रायवेट कॉन्वेन्ट स्कूलों मेंही पढ़ाते है। सच तो यह है कि निजीकरण के उद्गगाता या कट्टर समर्थक महान बुद्धजीवी ! आदरणीय देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजीके निजीकरन नितियोका जोरशोर से रैलियां,मार्चसे विरोधी करने वाले कांग्रेसी,राष्ट्रवादी ,
कम्युनिस्ट आदि के कार्यकर्ता और नेताजी भी अपने आर्थिक लाभ के लिए कॉन्वेंट स्कूल या इंफ्रास्ट्रक्चरके नाम पर परमानण्ट नो ग्रांट बेसीस पे इंजीनियरिंग,मेडिकल ,फॉर्मसी कॉलेज केवल पैसे कमाने(कुछ अपवादको छोड़कर) के लिए खोल बैठे है । वे भी उनके बेटे या बेटियों को सबसे ज्यादा फीस लेनेवाले कॉन्वेंट में पढ़ाते है,ईतनाही नहीं तो लेबर और ऑटो रिक्शा चालक भी अपने बेटे अंग्रेजी माध्य्म कॉन्वेन्टमेंही पढ़ाते है ( सरकारी स्कूलोसे इनका क्यों विश्वास उठा? यह चिंतन की बात है ना!) इससे आगे का सच यह है कि जिला परिषद.नगर परिषद ,महानगरपालिका या सरकारी स्कूलोमे/ अनुदानित स्कूल,सरकारी आइटीआइ/तंत्रनिकेतन कॉलेज में पढ़ाने वाले अर्थात सरकारी पगार लेनेवाले(कुछ अपवादों को छोड़कर) अध्यापक/ प्रशिक्षक /प्राध्यापकभी अपने बच्चे कॉन्वेंट मेंही पढ़ाते है। इतनाही नही तो बहुतांश शिक्षाधिकारी ,सीईओ,कलेक्टर ,एसपी इन महानुभाव के लड़के/ लड़कियों भी निजी अनएडेड कॉन्वेंट में पढ़ाए जा रहे है (कुछ अपवादको छोड़कर) ( कड़वी सच्चाई है ),(शेखचिल्ली जिस डालपर बैठा ,उसी डाल को काट रहा था ये तो आपने सुना होगा लेकिन आपने इसपर चिंतन नही किया होगा!)…इन सभी को लगता है कि अंग्रेजी कॉन्वेंट में पढने वाले विद्यार्थी स्कूलोसे सीधे कलेक्टर होकर निकलेंगे लेकिन यही कृतीसे सरकारी स्कूलों की बर्बादी शुरू हो गईं हैं और निजीकरण का दौर शुरू हो गया। इससे भविष्य में कॉन्वेंट स्कूल/प्रायवेट (कॉलेज,पॉलिटेक्निक,आईटीआय आदि) बढ़ेंगे और जिल्हा परिषद,नगर निगम ,महानगरोंके सरकारी स्कूल / कॉलेज बंद होंगे।इससे आगे का पड़ाव यह होगा कि अनुदानित स्कूल/ कॉलेजभी (*जहां *लाखो रुपये डोनेशन लेकर,(कुछ अपवादों को छोड़कर) अध्यापक/प्राध्यापक / *प्रधानाचर्य नियुक्ति कीए जाते हैं,सिर्फ पैसा *कमाना संस्था चालकोका मक़सद है लेकिन इन्हें समाजसेवी बताकर सनमानित किया जाता है और पेट भरना के लिए अध्यपक इस व्यवस्था की शरण में जी रहे है वे भी शहर में ख़ुदको ग्यानी बताकर ज्ञान बाटने की बात करते है राजकीय मकसद से काम करनेवाले नेता इन्हेंही सार्वजनिक उत्सव में स्टेज पर बिठाते है । ) वे भी भविष्य में बंद हों जाएंगे, इससे भविष्य में आम आदमियों के बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल या कम फीस लेनेवाले अनुदानित स्कूल/कॉलेज बंद हो जाएंगे और आम आदमी को लाखो रुपये देकर अपने बच्चे को अंग्रेजी माध्यम में ही पढ़ाना होगा अर्थात हम खुद पब्लिक सेक्टर और सरकारी सेक्टर पूरी तरह खत्म करने का काम कर रहे हैं।

सरकारी स्कूलों को दत्तक देना,सरकारी स्थाई नोकरीको कॉन्ट्रैक्ट मे बदलना ये सब हमारे कृति के रिजल्ट है.Action speak louder than words…खुद निजीकरण का कृति में साथ देकर निजीकरणके विरोध में नारेबाजी लगानेवाले दोहरा जीवन कबतक जिएंगे हम ! कहते है चोर के………….आप पूरा कीजिएगा। हम राष्ट्रीयकरन पक्ष में कृति में अमल करने वाले कल भी थे और आजभी हैं क्योंकि हम डॉ.बाबासाहब अम्बेडकर के विचारों में सिर्फ पारंगत [एम.ए.-डॉ.अम्बेडकर विचारधारा] नही है बल्कि डॉ. अम्बेडकर विचारधारा का कृतिमे अमल करनेवाले अम्बेडकरवादी है। चाहे जितना जोर लगाओ लेकिन एकदिन आप सबको देशकी सामान्य जनताका कल्याण करना है, या देश को निजीकरणसे रोखना है,या देश को युद्ध नीतिसे बचाना है तो केवल डॉ.अम्बेडकर विचारधारा को कृति में अमल करनाही होगा और हम सबकों इन विचारधारा के शरण मे आनाही होगा। जाती और मजहब के नामपर दंगे जगानेवाले।जवा खून को बहाकर शोहरत पानेवाले। अरे इन खुदगर्जी नेताओंके विचारोंसे बचना जरा होश में आना ए जोश में आनेवाले।…….
ऍड.डॉ.सत्यपाल कातकर,मनोवैज्ञानिक,माजी प्रधानाचार्य, शैक्षिक परामर्शदाता तथा लेखक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button