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खुद पर काबू पाने का सर्वोत्तम मार्ग योगा …. दैवशालिनी रामटेके

प्रतिनिधि चंद्रशेखर भोयर
सिहोरा:- जागतिक योगा दिन के शुभ अवसर पर सिहोरा क्षेत्र के हर स्कूल में योगा दिन जल्लोष के साथ मनाया गया. योगा के जरिये हर व्यक्ति अपने आप मे परिपक्व बन सकता है. यदि हमे अपना सर्वांगीण विकास करना हो तो बाकी सभी कार्यो के साथ साथ हमे अपने दिनचर्या मे योगा को उतारना चाहिए.
ऐसे ही योगा दिन के अवसर पर सिहोरा क्षेत्र में आने वाले ग्राम चांदपुर के जिला परिषद पूर्व माध्यमिक स्कूल में कल दिनांक 21/06/2024 को सुबह 7 बजे योगा दिन के अवसर पर योगा का कार्यक्रम लिया गया.


इस कार्यक्रम की शुरुवात सरस्वती वंदन और सावित्री बाई फुले इनके फोटो पूजन से की गयी.
इस कार्यक्रम को ग्राम चांदपुर के सरपंच वसंतकुमार धार्मिक के अध्यक्षता मे लिया गया. प्रमुख अतिथि के रूप में स्कूल के शिक्षा समिति अध्यक्ष विजय तितिरमारे, रोजगार सेवक संतोष घोडीचोर, माजी पोलिस पाटिल माणिक लांजे, ग्रामपंचायत लिपिक देवानंद राउत, ग्राम पंचायत सदस्य अमर कांबले, पोलिस पाटिल उर्मिला लांजे, सामाजिक सेविका अंजना नागलवाडे, अंगणवाडी सेविका लीला बाई घोडीचोर, नवभारत

व बहुजन मराठी पत्रकार संघ भंडारा जिला सम्पर्क प्रमुख चंद्रशेखर भोयर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे.


इस अवसर पर छात्रों को योग करने के फायदे और हमारी दिनचर्या पर योग से होने वाला सकारात्मक असर इस पर स्कूल के सहाय्यक शिक्षक संतोषकुमार बोपचे ने मार्गदर्शन किये.
स्कूल के मुख्याध्यापिका दैवशालिनी रामटेके इन्होने अपने मार्ग दर्शन बताया कि अपने जीवन को बेहतर बनाने का सर्वोत्तम मार्ग योगा है. अपने आप पर संतुलन पाने के लिए उस हर व्यक्ति ने योगा करना चाहिए जिसने मानव जन्म लिया है. योगा करने से हमारे शरीर की काफी बीमारिया अपने आप खत्म हो जाती है. ये एक प्रकार का थेरेपी होता है ऐसा कहने मे कोई बुराई नही. आज के इस माहौल में योगा की सख्त जरूरत है. हर घर में मानसिक तान- तनाव, डिप्रेशन पाया जाता है जिसके कारण हर व्यक्ति किसी ना किसी बीमारी से पीड़ित है. इतना ही नहीं तो हम अपना संतुलन खोने मे जरा भी देरी नही करते. इसीलिए हमे स्कूल के इस जीवन से ही योगा की ओर ध्यान देना चाहिए और उसे सीखना चाहिए. क्योंकि खुद पर काबू पाने का सर्वोत्तम मार्ग योगा है.
इस समय स्कूल के छात्र, गाव के प्रतिष्ठित नागरिक, बचत समूह की महिलाये और अन्य नागरिक उपस्थित थे.
कार्यक्रम का सुत्रसंचालन भूषण कुर्वे तो आभार लीला बाई घोडीचोर ने मानते हुए कार्यक्रम संपन्न किया गया.

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