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आजादी का अमृत महोत्सव कैसे मनाये हमारे दादा वीर शहीद मनीराम अहिरवार जी को तो आज तक कोई सम्मान नहीं ?


लेखक = मूलचन्द मेधोनिया (शहीद सुपौत्र) अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी

संजीव भांबोरे (ऑल इंडिया प्रतिनिधी)
मध्यप्रदेश (भोपाल) देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है 75 वीं वर्षगांठ के रूप में लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि मध्यप्रदेश के आजादी के आन्दोलन में अनुसूचित जाति के लोगों ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के बाद भी आज तक सम्मान से वंचित है ।
देश की स्वतंत्रता के लिए अनेक नेता एवं विभिन्न जातियों समुदाय के महान क्रांतिकारियों ने देश की आजादी में कुर्बानी दी है। मध्यप्रदेश के अनुसूचित जाति के अन्तर्गत आने वाली अहिरवार समाज के महान पराक्रमी वीर मनीराम अहिरवार जी जो कि सन 19 42 के स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के आवाहन पर अंग्रेजों भारत छोड़ो के आन्दोलन में संघर्ष कर हिस्सा लिया। वीर मनीराम अहिरवार जिला नरसिंहपुर तहसील गाडरवारा के नगर चीचली के निवासी थे। यहां पर गोंडवाना के राजा महाराज मध्यप्रदेश के अनेकों रियायतें में राज कर रहे थे। चीचली राजा के निधन होने पर उनके पुत्र शंकर प्रताप सिंह जू देव उत्तराधिकारी थे। जो कि नाबालिक थे। उन्हें पढ़ाई लिखाई करना था। चुंकि वह राजपाट छोटे होने के कारण नहीं चला पा रहे थे। अतः चीचली राजा के द्वारा जो सुरक्षाकर्मी, सेवादार व सेनिक तैनात थे। उनकी जबावदारी देते हुए चीचली राजा पढ़ने चले गये।
सन 19 42 के स्वतंत्रता आंदोलन की आग भोपाल, जबलपुर से लेकर जिले, कस्बों में फैल गई थी। चीचली राजमहल की प्रसिद्ध चर्चित थी। अतः राजमहल विन राजा की खबर लगते ही 23 अगस्त सन 1942 को अंग्रेजी सेना की एक टुकड़ी आ गई। जो कि गोंड महल पर कब्जा कर लूटपाट करने की फिराक में आये थे। चीचली राजमहल में उस समय सेनिक व सेवादार वीर मनीराम अहिरवार जी थे ।जिन्होंने देखा कि महल की ओर से अंग्रेजी सेना बड़े ही आ रही है। अतः चौकन्ना होते हुए उन्होंने कहा ठहरो! रुको क्यों महल की तरह आ रहे हो। लगातार आवाज देने के बाद भी अंग्रेजी सेना नहीं रुकी तो मनीराम अहिरवार जी के पास गुलेल पथराव ही बार करने और उन्हें रोकने का अस्त्र था। उन्होंने सीधे तौर पर अंग्रेजी सेना से भिड़ गये।
वीर मनीराम अहिरवार जी के अचूक निशाने से अंग्रेज सेनिक घायल होने लगे। महल का खास व्यक्ति और सेनिक मानकर अंग्रेजी सेना की ओर से गोलीयां वीर मनीराम अहिरवार जी पर दागना प्रारंभ की। उसी समय चीचली के युवाओं की एक टीम अंग्रेजी सेना राजमहल पर चढाई करने और वीर मनीराम अहिरवार के उनके बीच में युद्ध का समाचार सुनकर आ गये। तथा मनीराम अहिरवार के परम मित्र वीर मंशाराम जसाटी जी अंग्रेजी सेना सामना करने लगे और देश भक्ति के व इंकलाब जिंदाबाद, महात्मा गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। अंग्रेजी सेना ने सभी को जानने में कोई देरी न कर मनीराम अहिरवार को लक्ष्य कर गोली चलाई गई। जो कि वीर मंशाराम जसाटी जी के सीने में लगीं और वह युध्द स्थल पर ही शहीद हो गये।
अपने परम साथी देश भक्त वीर मंशाराम जसाटी जी की शहादत देखकर मनीराम अहिरवार आग बबूला हो गये। अपना सीना तान शरीर से कपड़े उतारने हुए आगे बढ़ते गये। ललकारते हुये अंग्रेजों साले देश के दुश्मन हो की गाली देते हुए अपन् सीना तान कर बोले मुझ पर गोली चलाओं। सभी अंग्रेजी सेना को मनीराम ने रक्तरंजित कर चुके थे। उन्हें अपनी जान बचाने की पड रही थी। अदम्य साहसी वीर मनीराम अहिरवार के सामने अंग्रेजी सेना परास्त हो चुकी थी। उन्होंने पुनः गोली मनीराम अहिरवार के सीने पर चलाई मनीराम आजू बाजू लेट और कर्तव्य दिखाते हुए गोली से बच गये। लेकिन पास में खड़ी वीरांगना गौरादेवी जी के सीने में लगी और वह भी मौके पर शहीद हो गई।
अंग्रेजों ने मनीराम अहिरवार से जान बचाकर भागना ही मुनासिब समझा। घायल अंग्रेजी सेना जाकर अपने अफसरों को पूरी-पूरी घटना जाकर बताई। दूसरे दिन 24 अगस्त 19 42 को अंग्रेजी अफसरों के नेतृत्व में सैन्य बल चीचली आ धमका। उस समय चीचली मेन बाजार में मनीराम अहिरवार की बहादुरी और शहादत देने बालों को श्रद्धांजलि अर्पित और नवयुवकों की एक सभा चल रही थी। इस सभा में मनीराम अहिरवार को सम्मानित किया जाता कि अंग्रेजी सेना ने आकर सभा बंद करबाई और मनीराम अहिरवार की पूछताछ की। न बताने पर कुछ युवाओं को गिरफ्तार कर ले जाया गया।
चीचली के गिरफ्तार लोगों से मनीराम के बारे में लगातार पूछताछ की गई। मनीराम जी भूमिगत होकर गोंडवाना राजमहल की धरोहर की रक्षा करते रहे। अंग्रेजी हुक्मरानों ने जाल फैलाया की किसी भी प्रकार से मनीराम अहिरवार को जिन्दा पकड़ा जाये। अनेकों गुप्त लोगों को भेजे गए। धोकेबाजी करके उन्हें अंग्रेजी सेना ने अपनी जेल ले गये। वहां पर उनका कद काठी देख बलशाली वीर मनीराम अहिरवार से बोला गया कि तुम स्वयं और अपनी अनुसूचित जाति व जनजातियों के लोगों को गुलामी व बेगारी कराने हेतु लेकर आओं। तुम्हें सभी का सरदार बना देंगे। ऐसी बात की मनीराम के द्वारा इंकार कर देने पर उन्हें प्रताड़ित करने लगे। तरह – तरह की यातना दी जाने लगी। हर जुल्म व ज्यादतियों को मनीराम अपने स्वाभिमान और देश समाज के सम्मान के खातिर अंग्रेजों की कोई भी शर्त न मानने पर उनको मौत दी गई ।अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है। लेकिन बहुत दुख की बात है कि ऐसे महाबलिदानी दलित वर्ग में आने वाली रविदासिया कौम के शहीद को न ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का और न ही शहीद होते हुए उन्हें राष्ट्रीय शहीद का सम्मान दिया गया है। यह चूक अभी तक सरकार की हुई। अतः जिला नरसिंहपुर के नगर चीचली के अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार जी के आजादी में योगदान की महान क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। उन्हें राष्ट्रीय शहीद होने का दर्जा दिया जाये। तथा परिवार को सम्मानित किया जाये। तभी अमृत महोत्सव की सार्थकता होगी, परिवार के उत्तराधिकारी मूलचन्द मेधोनिया ने अभी दिल्ली जाकर देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी को उक्त मांग को लेकर आवेदन पत्र स्वयं जाकर दिया है।
मूलचन्द मेधोनिया (शहीद सुपौत्र) अमर शहीद वीर मनीराम अहिरवार चीचली जिला नरसिंहपुर मोबाइल 8878054839

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