विवाद मुक्त समितियां बनी निष्क्रिय प्रशासन का ध्यान नहीं, ग्रामों में बढ़ रहे विवाद
पोलीस कि आवाज न्यूज़ नेटवर्क को जानकारी मिले नुसार राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री आर आर पाटिल की संकल्पना से महात्मा गांधी विवाद मुक्त ग्राम अभियान समितियों की स्थापना की गई थी ग्राम के विवाद पुलिस के बजाय गांव स्तर पर ही समन्वय से हल कर गांव में शांति व सुव्यवस्था प्रस्तावित करना उद्देश्य था लेकिन सरकार बदल गई व समय भी बदल गया, विवाद मुक्त समितियां अब केवल कागज पर रह गई है और निष्क्रिय दिखाई दे रही है
विवादों का नहीं हो रहा निपटारा
गांव में निर्माण होने वाले छोटे बड़े विवाद गांव स्तर पर समन्वय के साथ हल कर गांव में शांति प्रस्थापित करने सर्वधर्मीयो के होने वाले त्यौहार उत्सव एक साथ मनाने गांव में अवैध धंधे बंद कर गांव नशा मुक्त हो अनिष्ठ व कुप्रथा बंद हो शोषित पीड़ित महिलाओं को सुरक्षा का कवच मिले ऐसे अनेक उद्देश्यों को लेकर विमुस समितियां कार्यरत थी प्रशासन के दुर्लभ से असहयोग व उदासीनता से यह समितियां अब केवल कागजों पर शेष रह गई है जिससे गांव में विवादों का प्रमाण बड़ा है इसका सबसे अधिक असर ग्रामीणों सहित किसानों पर पड़ा है इसमें अधिकांश विवाद यह किसानों के साथ सीधे पुलिस स्टेशन व न्यायालय में जा रहे हैं विमुस अभियान की शुरुआत में अनेक गांव से सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई थी जिले के हर एक गांव में इन समितियों का गठन किया गया था एक समिति को सरपंच पद की तरह महत्व प्राप्त था क्योंकि अन्य किसानों के खेती के प्रश्नों, विवाद आदि से पुलिस विभाग को कोई परेशानी नहीं होती थी
बिना खर्च होता था विवादों का निपटारा
बिना खर्च व समन्वय से गांव व समाज के वरिष्ठ मंडल इस समिति के अध्यक्ष व सदस्य होने से उचित निर्णय लेकर विवादों का हल कर देते थे जिससे दोनों पक्षों का समाधान होता था इतना ही नहीं यह समिति न्यायालय की भूमिका निभा रही थी जिले में गांव स्तर पर विवाद हल करने में समितियों को सफलता मिली थी जिससे न्यायालय व्यवस्था व पुलिस विभाग का भोज काफी कम हो गया था लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शासन स्तर पर इस और दूर लक्ष्य किया जा रहा है उल्लेखनीय है कि इस अभियान को क्रियान्वित करते समय पुलिस पटेल व बीट जमादार का सहयोग मिलने से मामूली विवाद पुलिस स्टेशन में नहीं पहुंच रहे थे इस महत्वपूर्ण योजना की और शासन की उदासीन नीति है जिससे विवाद मुक्ता समितियां निष्क्रिय हो गई है
रूपसिंग फत्तू जी पिलगर
पत्रकार
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