बाल विवाह होने पर गवाना पड़ेगा पद
सरपंच, सदस्य, पुलिस पाटील पर होगी कार्रवाई ,महिला आयोग का फैसला
पोलीस की आवाज न्यूज़ नेटवर्क को जानकारी मिले नुसार बाल विवाह पर प्रतिबंध के बावजूद भी ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह कराए जाते हैं बाल विवाह कानून को सख्ती से अमल में लाने के लिए राज्य महिला आयोग ने एक कठोर फैसला लिया है इस फैसले के तहत यदि किसी भी गांव में बाल विवाह होता है तो उस गांव के सरपंच को अपना पद गंवाना पड़ेगा यही नहीं तो सरपंच ,ग्राम सदस्य ,पुलिस पाटिल और पंजीयन अधिकारी पर कार्यवाही होगी। इतना ही नहीं तो अपराध भी दर्ज किया जाएगा बता दें कि बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम के तहत बाल विवाह होने पर नववधू , वर्ग के माता पिता, मंगल कार्यालय के मालिक, पंडित और फोटोग्राफर पर मामला दर्ज किया जाता है, लेकिन अब इस कानून के दायरे को बढ़ा दिया गया है इसमें अब ग्राम सरपंच, सदस्य, पुलिस पाटिल और पंजीयन अधिकारी को भी शामिल कर लिया है बाल विवाह अधिनियम में परिजनों के साथ ही जनप्रतिनिधि भी रडार पर आ चुके हैं अब यदि गांव में बाल विवाह होने पर सरपंचों को अपने पद से हाथ धोना पड़ेगा
बाल विवाह कानून में किया गया सुधार
बाल विवाह प्रतिबंधक अधिनियम सबसे पहले साल 1929 में अमल में लाया गया किस अधिनियम के तहत लड़की की उम्र 14 और लड़कों की उम्र १८ वर्ष निर्धारित की गई इसके बाद 1955 में हिंदू विवाह एक्ट के अनुसार विवाह के लिए लड़कियों की उम्र 15 वर्ष लड़कों की उम्र 18 वर्ष रखी गई वर्ष 1978 में बाल विवाह कानून में फिर से सुधार किया गया इसमें लड़कियों के शादी की उम्र 18 और लड़कों की शादी की उम्र 21 कर दी गई इसके बाद पुरुष और महिला के विवाह योग्य उम्र में समानता लाने महिलाओं के लिए विभाग की कानूनी उम्र 18 से 21 करने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी
रुपसिंग फत्तू जी पिलगर
पत्रकार * पोलीस की आवाज न्यूज़ नेटवर्क*
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